Monday, October 13, 2008

मूल मंत्र

बने रहो पगला , काम करेगा अगला!

बने रहो लुल्ल , सैलरी पाओ फुल !

मत लो टेंशन , नही तो फॅमिली पायेगी पेंशन !

काम से दरो नही , काम को करो नही !

काम करो या करो , काम की फीक्र जरूर करो !

....और फीकर करो करो , जीक्र जरूर करो !


Vikas Bajpai
CS Final Year

2 comments:

komal said...

Hahaha..
definetly this is your poem...no one can thing like this way..
same as u always do..zkirk..
iske aage bhi toh badho.. ;)

ANKIT said...

vikas babu ye poem aap per bilkul fit baithti hai