Friday, December 26, 2008

हिन्दुस्तानी

अपने घरो को जलता देख चुप रहने की आदत है हमें ,
हिन्दुस्तानी हैं हम सदा चुप रहने की आदत है हमें

khud ko को धर्मो की जन्मस्थली कहते हैं हम ,
मगर धर्म्युध्हो के नाम पर कटने की आदत है हमें
हिन्दुस्तानी हैं हम,हर ज़ुल्म सहने की आदत है हमें

वसुन्धारेओ कुटुम्बकम का नारा दुनिया को दिया,
पर हर आक्रमण अपने सीने पर सहने की आदत है हमें,
हिन्दुस्तानी हैं हम,हर वार सहने की आदत हैं हमें

समंदरी चट्टानों की तरह हर थपेडो को सहते हैं,चुप रहते हैं,
मुस्कुराने की आदत है हमें ,
हिन्दुस्तानी हैं हम,तुफानो से टकराने की आदत है हमें

फ़िर लाल आँधियों में डूबा है इक शहर ,
औ हवाओ ने रुख हमारे ख़िलाफ़ किया है,
फ़िर लाल लहू में डूबा है हर मंज़र ,
औ इंसानियत की आज फ़िर चिताएं जली हैं ,

पर हवाओ का रुख फ़िर अपनी और मोडेंगे ,
हवाओ की रुख बदलने की आदत है हमें,
हिन्दुस्तानी हैं हम,हर ज़ंग जीतने की आदत है हमें

3 comments:

Vikas Bajpai said...

hmmm.....baat to tumne sach likhi hai...aur waise bhi we indians are know for our these kinds of behaviour and attitude only....
tabhi to hum sab se MAHAN hain.... :)

उन्मुक्त said...

अच्छी कविता है। हिन्दी में और भी लिखिये।

Anonymous said...

really good poem to read n let the readers feels dat v arnt only to raise the flag fr humanity n haumanism but to take initiative and wrk for betterment.........keep writing .