Saturday, November 15, 2008

SOONI SAANJH

फ़िर शाम ढली , फ़िर जाम खुले,
फ़िर याद तुम्हारी आई है ।
पैमानों के टकराने में और जामो के छलकाने में
फ़िर से वो मस्ती छाई है
फ़िर से दिल में इक टीस उठी औ फ़िर तू मुझको याद आई ,
फ़िर से दो बूँद लिए आँखों में, मुस्कान लबो पर छाई है ।
फ़िर से पैमाने टूटेंगे,जब बात तुम्हारी आएगी,
मैं तनहा ही रह दुनिया आगे बढ़ जायेगी ।
फ़िर मदहोशी के आलम में ,बेह्कुंगा औ सम्भ्लूँगा मैं ,
फ़िर तू मुझ पर छा जायेगी औ यादो में बस जायेगी

2 comments:

Anonymous said...

Oye guru tussi to chaa gaye guru....

smita said...

really gud one.......lagta hai bahut dard hai .....hmmm?